राजस्थान के विभिन्न कांड जीके Rajasthan ke vibin kand gk ( Rajasthan gk)

📌 राजस्थान के विभिन्न कांड (टेबल रूप में)


1 मांगढ़ हत्याकांड 1913, बांसवाड़ा-डूंगरपुर गोविंद गुरु के नेतृत्व में आदिवासियों का अन्याय व करों के खिलाफ आंदोलन लगभग 1500+ भील शहीद, इसे राजस्थान का जलियांवाला बाग कहा गया

2 नीमाड़ा हत्याकांड 1925, सीकर किसान जागीरदारों के लगान और अत्याचार से पीड़ित कई किसान शहीद, किसान आंदोलन को नई दिशा

3 डाबी हत्याकांड 1923, कोटा किसानों द्वारा लगान व शोषण के विरोध में आंदोलन निहत्थे किसानों पर गोलीबारी, कई शहीद

4 गोविंदपुरा हत्याकांड 1942, जयपुर भारत छोड़ो आंदोलन के समर्थन में प्रदर्शन पुलिस गोलीबारी, स्वतंत्रता आंदोलन में तेजी

5 नीमूचाना हत्याकांड 1925, अलवर बेगार प्रथा और भारी लगान के खिलाफ आंदोलन कई किसान शहीद, किसान चेतना जागृत

6 बीकानेर सरियान्तर प्रकरण 1939, बीकानेर स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा अंग्रेज विरोधी गतिविधियाँ कई गिरफ्तारियाँ, स्वतंत्रता आंदोलन मजबूत

7 डोगरा कांड 1946, अजमेर डोगरा सैनिकों द्वारा अन्याय के खिलाफ आवाज दमन व हिंसा, विद्रोह की भावना बढ़ी

8 चांदावल घटना 1923, पाली किसानों द्वारा बेगार व लगान विरोधी आंदोलन गोलीकांड, कई किसान शहीद

9 दूधवा-खारा किसान आंदोलन 1947, गंगानगर नहर जल वितरण व किसान अधिकार आंदोलन सफल, किसानों की मांगे मानी गईं

10 सागरमल गोपाल हत्या कांड 1946, जैसलमेर/अजमेर स्वतंत्रता सेनानी सागरमल गोपाल की गिरफ्तारी व यातना जेल में हत्या, अमर शहीद के रूप में स्मरण

11 कांगड़ी कांड 1947, बीकानेर किसानों और जागीरदारों का संघर्ष गोलीकांड, किसान शहीद

12 बीरबल कांड 1947, रायसिंहनगर किसान नेता बीरबल की हत्या आक्रोश, स्वतंत्रता संग्राम में तेजी

13 धाबड़ा कांड 1947, डीडवाना-कुचामन (नागौर) किसानों की मांगें पूरी न होने पर आंदोलन गोलीकांड, किसान शहीद

14 तोसीमो कांड 1947, जोधपुर किसानों के कर राहत और अधिकारों की मांग गोलीकांड, कई शहीद

15 पुनवाड़ा कांड 1947, डूंगरपुर आदिवासी व किसान आंदोलन आदिवासी समाज में स्वतंत्रता की चेतना फैली


1. मांगढ़ हत्याकांड (1913, बांसवाड़ा-डूंगरपुर सीमा)


इसे राजस्थान का जलियांवाला बाग कांड कहा जाता है।

गोविंद गुरु के नेतृत्व में भीलों ने सामाजिक सुधार और अन्याय के खिलाफ आंदोलन शुरू किया।

17 नवंबर 1913 को हजारों भील मांगढ़ पहाड़ी पर एकत्र हुए।

अंग्रेज सेना ने चारों ओर से घेरकर गोलियां चलाईं।

अनुमानतः 1500 से अधिक भील शहीद हुए।

👉 महत्व – यह आदिवासी स्वतंत्रता आंदोलन का सबसे बड़ा बलिदान था और गोविंद गुरु आदिवासी समाज के नायक बन गए।


2. नीमाड़ा हत्याकांड (1925, सीकर)


यह कांड किसानों और जागीरदारों के टकराव से जुड़ा था।

किसान लगान और शोषण से परेशान थे।

नीमाड़ा गाँव में किसानों ने विरोध जताया।

जागीरदार की सेना ने हमला किया, जिसमें कई किसान शहीद हुए।

👉 महत्व – इस घटना ने किसान आंदोलनों को और अधिक उग्र बनाया और किसानों में एकता की भावना को जन्म दिया।


3. डाबी हत्याकांड (1923, कोटा)


यह कांड कोटा राज्य के डाबी गाँव में हुआ।

किसानों ने अत्यधिक लगान और अन्याय के खिलाफ प्रदर्शन किया।

सैनिकों ने निहत्थे किसानों पर गोलियां चला दीं।

अनेक किसान शहीद हुए और यह कांड इतिहास में दर्ज हो गया।

👉 महत्व – इस घटना ने हाड़ौती क्षेत्र में किसान आंदोलन को मजबूती दी।


4. गोविंदपुरा हत्याकांड (1942, जयपुर)


भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जयपुर राज्य के गोविंदपुरा गाँव में यह घटना हुई।

लोग स्वतंत्रता की मांग कर रहे थे।

अंग्रेजी सरकार और रियासत की पुलिस ने मिलकर दमन किया।

गोलीकांड में कई लोग शहीद हुए।

👉 महत्व – इस कांड ने राजस्थान में स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा दी।


5. नीमूचाना हत्याकांड (1925, अलवर)


इसे राजस्थान का एक बड़ा किसान विद्रोह माना जाता है।

किसानों ने बेगार प्रथा और लगान के खिलाफ आवाज उठाई।

अलवर राज्य की सेना ने आंदोलन को दबाने के लिए गोली चलाई।

कई किसान शहीद हुए।

👉 महत्व – किसानों के अधिकारों की लड़ाई में यह घटना मील का पत्थर साबित हुई।


6. बीकानेर सरियान्तर प्रकरण (1939)


इसे बीकानेर षड्यंत्र केस भी कहा जाता है।

स्वतंत्रता सेनानियों ने बीकानेर राज्य में अंग्रेजी शासन के खिलाफ आंदोलन चलाया।

इसमें कई नेताओं को गिरफ्तार किया गया।

यह घटना बीकानेर के राजनीतिक इतिहास में महत्वपूर्ण है।

👉 महत्व – इसने जनता में आज़ादी की चेतना और तेज की।


7. डोगरा कांड (1946, अजमेर)


यह कांड अजमेर में हुआ।

सेना में कार्यरत डोगरा सैनिकों ने अन्याय और शोषण के खिलाफ आवाज उठाई।

अंग्रेज अधिकारियों ने कठोर दमन किया।

गोलीकांड और हिंसा के कारण यह घटना प्रसिद्ध हुई।

👉 महत्व – इस घटना ने सैनिक विद्रोह की भावना को जन्म दिया।


8. चांदावल घटना (1923, पाली)


पाली जिले के चांदावल गाँव में किसानों ने जागीरदारों के खिलाफ आंदोलन किया।

किसानों को बेगार और भारी लगान से मुक्ति चाहिए थी।

गोलीकांड में कई किसान शहीद हुए।

👉 महत्व – यह घटना किसानों की आज़ादी और अधिकारों की लड़ाई का प्रतीक बनी।


9. दूधवा-खारा किसान आंदोलन (1947, गंगानगर)


यह आंदोलन गंगानगर के दूधवा और खारा गाँव में हुआ।

किसानों ने नहर व्यवस्था और पानी के बंटवारे में न्याय की मांग की।

सरकार ने आंदोलन को दबाने का प्रयास किया।

किसानों ने बड़ा संघर्ष किया और अंततः उनकी मांगे मानी गईं।

👉 महत्व – यह किसान अधिकारों के लिए सफल आंदोलन था।


10. सागरमल गोपाल हत्या कांड (1946, अजमेर-जैसलमेर)


स्वतंत्रता सेनानी सागरमल गोपाल का जन्म जैसलमेर में हुआ था।

वे अंग्रेजी और महारावल के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे।

उन्हें गिरफ्तार कर यातनाएँ दी गईं।

जेल में ही उनकी हत्या कर दी गई।

👉 महत्व – सागरमल गोपाल को राजस्थान का अमर शहीद माना जाता है।


11. कांगड़ी कांड (1947, बीकानेर)


यह कांड बीकानेर के कांगड़ी गाँव में हुआ।

किसानों और जागीरदारों के बीच संघर्ष हुआ।

गोलीकांड में कई किसान शहीद हुए।

👉 महत्व – यह घटना किसानों की एकता और बलिदान का प्रतीक बनी।


12. बीरबल कांड (1947, रायसिंहनगर)


यह कांड स्वतंत्रता संग्राम के समय हुआ।

बीरबल नामक किसान नेता की हत्या कर दी गई।

इससे किसानों और जनता में आक्रोश फैल गया।

👉 महत्व – यह घटना स्वतंत्रता संग्राम में शहीदों के योगदान का उदाहरण है।


13. धाबड़ा कांड (1947, डीडवाना-कुचामन, नागौर)


डीडवाना-कुचामन क्षेत्र में किसानों ने आंदोलन किया।

किसानों की मांगें पूरी न होने पर गोलीकांड हुआ।

अनेक किसान शहीद हुए।

👉 महत्व – नागौर क्षेत्र में किसान चेतना को प्रबल किया।


14. तोसीमो कांड (1947, जोधपुर)


यह कांड जोधपुर जिले के तोसीमो गाँव में हुआ।

किसानों ने अपने अधिकारों और करों में राहत की मांग की।

आंदोलन को दबाने के लिए गोलीकांड हुआ।

👉 महत्व – यह घटना किसानों के अधिकारों और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी है।


15. पुनवाड़ा कांड (1947, डूंगरपुर)


डूंगरपुर जिले के पुनवाड़ा गाँव में यह घटना हुई।

आदिवासियों और किसानों ने सामाजिक समानता और आज़ादी की मांग की।

आंदोलन में गोलीकांड हुआ और कई लोग शहीद हुए।

👉 महत्व – आदिवासी समाज में स्वतंत्रता की चेतना फैली

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