राजस्थान की प्रमुख छत्रियां जीके (Cenotaphs of Rajasthan gk)


राजस्थान की प्रमुख छत्रियां (Cenotaphs or Rajasthan gk)


उसमें मैं राजस्थान की प्रमुख छतरियों जैसे –

जसवंत थड़ा (जोधपुर)

बदा बाग (जैसलमेर)

गेटोर की छतरियां (जयपुर)

मंडोर की छतरियां (जोधपुर)

गजनेरी छतरियां (बीकानेर)

राजस्थान अपनी वीरता, शौर्य और शाही इतिहास के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहां के राजाओं, रानियों और वीर योद्धाओं की स्मृति को जीवित रखने के लिए छत्रियां (Cenotaphs) बनाई जाती रही हैं। ये छत्रियां न केवल स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण हैं, बल्कि राजस्थान की संस्कृति, परंपरा और इतिहास की झलक भी प्रस्तुत करती हैं।


छत्रियों का महत्व


छत्रियां राजस्थान की राजपूत स्थापत्य कला का एक अनोखा रूप हैं। ये संगमरमर, बलुआ पत्थर और चूना-पत्थर से बनी होती हैं। इन्हें मुख्य रूप से राजाओं और वीर योद्धाओं की स्मृति में बनाया जाता था। छत्रियों का उपयोग कभी समाधि स्थल के रूप में तो कभी स्मारक के रूप में किया जाता है।


1. बदा बाग की छत्रियां (जैसलमेर)

स्थान: जैसलमेर

बदा बाग जैसलमेर के शाही शासकों की स्मृति से जुड़ा स्थल है। यहां पर जैसलमेर के महारावल शासकों की समाधियों पर बनी छत्रियां देखने को मिलती हैं।

पीले बलुआ पत्थर से बनी ये छत्रियां राजस्थान की मरुस्थलीय स्थापत्य कला का श्रेष्ठ उदाहरण हैं।

यहां से सूर्योदय और सूर्यास्त का नज़ारा बेहद अद्भुत दिखाई देता है।


2. गजनेरी छत्रियां (बीकानेर)

स्थान: बीकानेर

बीकानेर में स्थित गजनेरी छत्रियां बीकानेर राजघराने के शासकों की स्मृति में निर्मित की गई थीं।

यहां की छत्रियों पर बनी जटिल नक्काशी और वास्तुकला बीकानेर की सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाती है।


3. जसवंत थड़ा (जोधपुर)

स्थान: जोधपुर

जसवंत थड़ा को "मारवाड़ का ताजमहल" कहा जाता है। यह महाराजा जसवंत सिंह द्वितीय की स्मृति में सन 1899 में निर्मित किया गया था।

यह सफेद संगमरमर से बनी छत्री है, जिसमें बारीक जालीदार नक्काशी और सुंदर डिजाइन देखने को मिलती है।

जसवंत थड़ा उम्मेद भवन पैलेस और मेहरानगढ़ किले के पास स्थित है।


4. गढ़ीसर छत्रियां (जैसलमेर)

स्थान: जैसलमेर

गढ़ीसर झील के पास बनी छत्रियां राजपूत स्थापत्य की सुंदर झलक प्रस्तुत करती हैं।

यहां की छतरियां धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों महत्व रखती हैं।


5. आभानेरी की छत्रियां (दौसा)

स्थान: दौसा जिला

आभानेरी का नाम मुख्यतः चांद बावड़ी के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन यहां बनी पुरानी छत्रियां भी पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।

यहां की छतरियां राजस्थान के ग्रामीण स्थापत्य और ऐतिहासिक वैभव को दिखाती हैं।


6. गजनेरी छत्रियां (जयपुर - गेटोर की छतरियां)

स्थान: जयपुर

जयपुर के पास नाहरगढ़ पहाड़ियों की तलहटी में स्थित गेटोर की छतरियां जयपुर के महाराजाओं की समाधियों पर बनी हैं।

संगमरमर और बलुआ पत्थर से बनी ये छतरियां अपनी भव्यता और शिल्पकला के लिए जानी जाती हैं।

यहां की छतरियों पर बनी मूर्तियां और नक्काशी देखने लायक होती हैं।


7. रानी की छतरियां (बुंदी और कोटा)

स्थान: बुंदी और कोटा

राजस्थान में केवल राजाओं की ही नहीं बल्कि रानियों की स्मृति में भी छत्रियां बनाई गई हैं।

बुंदी और कोटा की रानी छतरियां इनकी स्थापत्य कला और इतिहास को संजोए हुए हैं।


8. मंडोर की छत्रियां (जोधपुर)

स्थान: जोधपुर

मंडोर गार्डन जोधपुर के पास स्थित है। यहां मारवाड़ के शासकों की कई छतरियां बनी हुई हैं।

संगमरमर और लाल पत्थर से बनी ये छतरियां अपने विशाल आकार और सुंदर नक्काशी के लिए प्रसिद्ध हैं।


9. कुम्भलगढ़ की छतरियां (राजसमंद)

स्थान: राजसमंद

कुम्भलगढ़ किले के आसपास भी कई छतरियां बनी हुई हैं, जो यहां के राजाओं और योद्धाओं की स्मृति को दर्शाती हैं।

छतरियों का सांस्कृतिक महत्व

राजस्थान की ये छतरियां केवल समाधि स्थल नहीं बल्कि इतिहास और वास्तुकला की जीवंत धरोहर हैं।

यहां की नक्काशी में हिंदू धर्म के देवी-देवता, पशु-पक्षी और पुष्प आकृतियां देखने को मिलती हैं।

यह स्थल आज भी पर्यटन, इतिहास अध्ययन और सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण हैं।


निष्कर्ष


राजस्थान की प्रमुख छत्रियां न केवल यहां की वीरता और परंपरा को संजोए हुए हैं, बल्कि यह कला और स्थापत्य के अद्भुत उदाहरण भी हैं। जैसलमेर का बदा बाग, जोधपुर का जसवंत थड़ा, जयपुर का गेटोर की छतरियां और बीकानेर की गजनेरी छतरियां आज भी लाखों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं।

राजस्थान की छतरियां हमें यह संदेश देती हैं कि वीरता और त्याग कभी भुलाए नहीं जाते, बल्कि उन्हें इतिहास की धरोहर के रूप में सहेजा जाता है।

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